Monday, November 2, 2026

ज़िद और ज़रूरत

आपकी ज़िद है या आपकी कमी है। ज़िद है कि मैं जो भी करूं उसके लिए ख़ुद से और दूसरों से ये बोल सकूं कि मैंने जो भी किया उसके लिए मैं ख़ुद ज़िम्मेदार हूं। मैं उन निर्णयों कि बात कर रहा हूँ जहाँ पर मैं consciously अपना behavior और अपने principles formulate करता हूँ। जैसे कि अपने बहुत महत्वपूर्ण काम के लिए, जिसका निर्णय किसी और के हाथों में है, मैं ख़ुद से ये कहता हूँ कि इस काम के लिए अपनी ego soft या flexible नहीं बनाऊँगा।

या ये मेरी कमी है कि मैं soft या flexible हो ही नहीं सकता। और friction create करता रहता हूँ, अपने लिए और दूसरों के लिए। 

हर समय हर तरह के दबाव होते हैं। पर हर समय हमारे पास विकल्प भी होते हैं। विकल्प चुनते हम हैं लेकिन बोलते हैं कि हम मजबूर थे इसलिए पूरा दोष हमारा नहीं है।

तो या तो मेरी ज़िद है या मेरी कमी है, जिसकी वजह से मुझे और मेरे परिवार को वो नहीं मिलता जो एक सामान्य जीवन के लिए बहुत ज़रूरी है।

तो बन्दा करे तो करे क्या!

कमी बर्दाश्त होती नहीं और ख़ुद में बदलाव स्वीकार नहीं।

तो बन्दा करे तो करे क्या!